Phalen Holi by Idris Ahmed

phalen holi

Phalen Holi by Idris Ahmed

उत्तर प्रदेश के ब्रज में एक शांत सा गांव जिसका रास्ता छोटी छोटी सड़कों से और बेशुमार सरसों के खेतों के करीब से गुज़रता हुआ हमको एक ऐसे ख़ाली खेत तक ले आया जहाँ पहले ही से बहुत सी गाड़ियां पार्क थी । हमने भी अपनी गाडी किसी पगडण्डी के किनारे पे लगाई और तेज़ी से ‘ प्रहलाद मंदिर’ के जानिब बढे, गांव के छोटे से चौराहे पे बना हरे रंग का ये प्यारा सा मंदिर जिसके भीतर पंडित जी एकदम शांत बैठे हुए और उनके साथी हवन की रस्मों को पूरा करते हुए बीच बीच में भक्तों को प्रशाद बाँट रहे थे । हमने पंडित जी को नमस्कार किया, प्रशाद लिया और किसी vantage point की तलाश में इर्द-गिर्द घूमने लगे । कई घरों के दरवाज़े खटखटाए जहाँ पे पहेले ही से सौ-पचास लोग होंगे, मगर किसी ने दरवाज़ा खोलने की ज़हमत नहीं की,   बहरहाल हमने कुछ तस्वीरें चौराहे ही से खींची और फिर एक अच्छे spot की तलाश में लग गए ।

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तकरीबन छह-सात घरों और दो-ढाई घंटो के बाद एक छत मिली जिसपे कम से कम दो सौ लोग खचाखच भरे थे और अभी वाले spot से मंदिर की सिर्फ छत्त दिख रही थी । लगता ना था के ‘विसाल-ए-यार’ होगा मगर हम भी डटे रहे, कभी कोई अपने दोस्त को लेने जाता या नेचुरल reasons के वजह से उठता तो हम कुछ इंच और आगे हो जाते, दो घंटे में कुछ चार फुट बढ़के अब मंदिर साफ़ नज़र आता था और होली में जलाने वाला भूस का ढेर भी । कई घंटों से सुनने में आ रहा था की अब पंडित जी जल्द ही ‘प्रह्लाद कुंड’ की ओर बढ़ेंगे…नहाएंगे और फिर जलती होली के ढेर से गुज़रेंगे, यकीन नहीं हो रहा था की इस दो-तीन मंज़िल दिखने वाले ढेर से कोई इंसान कैसे safely गुज़र पाएगा ।

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ऐसे माहौल में लोगों के बातें सुनने का मज़ा ही अगल है, क्या कमल का raw sense of humour होता है कुछ लोगों का । बहरहाल इस सब के बीच में अचानक अफरा-तफरी होनी लगी और कई लोग हाथों में लट्ठ लिए ज़ोर ज़ोर से मंदिर के आस पास घूमने लगे, ऐसा लगता था अब कुछ एक्शन होने वाला है और कुछ ही पलों में  मंदिर से पंडित जी निकलें और कुंड की तरह चल पड़े और आँखों से बोझल हो गए । इसी बीच में भूस के ढेर मे आग लगा दी गयी और आग की  लपटें ना जाने कितनी मंज़िलों ऊँची उठीं और ऐसे शदीद तपिश हुई के लोगों को अपनी जगह से कई कई फुट पीछे होना पड़ा, ऐसा लगता था मानो कैमरा पिघल जाएगा ।

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अब लोगों के दिल के दड़कनें बढ़ने लगीं थीं और energy का level शबाब पे था । हम अपना फ्रेम बनाये, अपनी आँखें आग के ढेर पे गाड़े हुई पंडित जी का इंतज़ार कर रहे थे के अचकनक लोग ज़ोर ज़ोर से “भक्त प्रहलाद की जय” बोलने लगे और ना जाने कब पंडित जी आग मे कूदे और आर-पार हो गए  । हमारे दिल की दधकन कुछ पल को रुकी और हमने ख़ुदा का शुक्र अदा किया की पंडित जी सही सलामत इस आग के ढेर से निकल गए ।

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मज़हब कोई भी हो विश्वास पुख्ता होना चाहिए ! रब अपने चाहने वालों की हर हाल में हिफाज़त करता है ॥

“भक्त प्रहलाद की जय”